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सोमवार, 10 सितंबर 2012
इन्दौर में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है ...
राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान को इन्दौर में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है। ऐसे युवक जो कि एमबीए डिग्रीधारी हो या फिर जिन्हें मीडिया मार्केटिंग के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो वह इस पद के लिए panchayatkimuskan@gmail.com पर अपना बायोडाटा भेज सकते हैं। मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त व्यक्ति का कार्यक्षेत्र संपूर्ण इन्दौर परिक्षेत्र होगा । मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त उम्मीद्वार को राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान के प्रचार प्रसार के साथ साथ इसकी वेब पत्रिका पंचायत की मुस्कान का प्रचार प्रसार एवं उनके लिए विज्ञापन लाने एवं विज्ञापन राशि एकत्रित करने का कार्य करना होगा। मार्केटिंग हेड आवश्यकतान ुसार अपने साथ सहायक भी रख सकता है। उन्हें योग्यतानुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इंटरनेंट पर पंचायत की मुस्कान पत्रिका कोwww.panchayatkimuskan.blogspot.com पर पढ़ा जा सकता है वहीं पंचायत की मुस्कान की वेबसाईट www.panchayatkimuskan.com पर लागिन कर देखे जा सकते हैं।
भोपाल में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है ...
राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान को भोपाल में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है। ऐसे युवक जो कि एमबीए डिग्रीधारी हो या फिर जिन्हें मीडिया मार्केटिंग के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो वह इस पद के लिए panchayatkimuskan@gmail.com पर अपना बायोडाटा भेज सकते हैं। मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त व्यक्ति का कार्यक्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश होगा वहीं उनका फोकस विशेष रूप से मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पर होगा। मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त उम्मीद्वार को राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान के प्रचार प्रसार के साथ साथ इसकी वेब पत्रिका पंचायत की मुस्कान का प्रचार प्रसार एवं उनके लिए विज्ञापन लाने एवं विज्ञापन राशि एकत्रित करने का कार्य करना होगा। मार्केटिंग हेड आवश्यकतान ुसार अपने साथ सहायक भी रख सकता है। उन्हें योग्यतानुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इंटरनेंट पर पंचायत की मुस्कान पत्रिका कोwww.panchayatkimuskan.blogspot.com पर पढ़ा जा सकता है वहीं पंचायत की मुस्कान की वेबसाईट www.panchayatkimuskan.com पर लागिन कर देखे जा सकते हैं।
रायपुर में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है ...
राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान को रायपुर में मार्केटिंग हेड की आवश्यकता है। ऐसे युवक जो कि एमबीए डिग्रीधारी हो या फिर जिन्हें मीडिया मार्केटिंग के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो वह इस पद के लिए panchayatkimuskan@gmail.com पर अपना बायोडाटा भेज सकते हैं। मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त व्यक्ति का कार्यक्षेत्र संपूर्ण छत्तीसगढ़ होगा वहीं उनका फोकस विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पर होगा। मार्केटिंग हेड के रूप में नियुक्त उम्मीद्वार को राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान के प्रचार प्रसार के साथ साथ इसकी वेब पत्रिका पंचायत की मुस्कान का प्रचार प्रसार एवं उनके लिए विज्ञापन लाने एवं विज्ञापन राशि एकत्रित करने का कार्य करना होगा। मार्केटिंग हेड आवश्यकतान ुसार अपने साथ सहायक भी रख सकता है। उन्हें योग्यतानुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इंटरनेंट पर पंचायत की मुस्कान पत्रिका कोwww.panchayatkimuskan.blogspot.com पर पढ़ा जा सकता है वहीं पंचायत की मुस्कान की वेबसाईट www.panchayatkimuskan.com पर लागिन कर देखे जा सकते हैं।
पुस्तक समीक्षा - पंचायत की मुस्कान का अगस्त अंक संग्रहणीय
श्रीमती यशवंत रानी
देश प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना से ओत प्रोत रहने वाले लोगों को पंचायत की मुस्कान के अगस्त 2012 के अंक में काफी कुछ जानकारियां हासिल हो सकती है। अपने कव्हर पेज की तरह ही अगस्त अंक के अंदर के पन्ने भी काफी आकर्षक है। कव्हर पेज में जहां लाखों देशप्रेमियों के समक्ष उदबोधन देते राष्ट्रपति महात्मा गांधी आकर्षित करते हैं वहीं कव्हर स्टोरी 15 अगस्त 1947 जब भारत आजाद हुआ वाकई में लाजवाब है तथा उसे देखकर ही इस बात का अंदाजा हो जाता है कि इस अंक के उपर में वाकई में पंचायत की मुस्कान की टीम के द्वारा काफी मेहनत की गई है। कव्हर स्टोरी में 26 चित्रों के माध्यम से 15 अगस्त 1947 के उन पलों को एक बार फिर से ताजा किया गया है जिस दिन अंग्रेजों की 200 साल से भी लंबी दासता से हमें आजादी प्राप्त हुई थी। इन तस्वीरों में आधी रात को भारत को आजादी प्राप्त होने से लेकर, राजपथ के उल्लास, झंडावंदन, जवाहर लाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण, राजपथ के माहौल, द हिन्दुस्तान टाईम्स, मार्निंग न्यूज, द स्टेटमेन, द टाईम्स आफ इंडिया, और द न्यूयार्क टाईम्स के 15 अगस्त 1947 के अंक में भारत से जुड़ी खबरों के प्रकाशन, भारत की आजादी के अवसर पर 15 अगस्त 1947 को निकाले गए सिक्के, मेडल, स्टांप के साथ साथ पत्रों में उस दिन लगे सील मोहर तक के निशान पूरी खबर को संग्रहणीय बना देते हैं। मिशन 2013 में हमेशा की तरह राजनीति पर चर्चा की गई है तो अन्ना की पार्टी पर पाठकों की राय के माध्यम से यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या अन्ना हजारे को पार्टी बनानी चाहिए ? इसी स्तंभ में एक पाठक की प्रतिक्रिया ‘‘कछु ले लुआ के भ्रष्टाचार मुक्त देश बना दो न मनमोहन जी ... ’’ को बाक्स में स्थान दिया गया है। एसएमएस जोन के स्थान पर पूरे एक पन्ने में स्वतंत्रता दिवस संदेश का प्रकाशन कर राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर प्रकाशित स्तंभ को सार्थक किया गया है तो समाज स्तंभ में अपहरणकर्ता मां ...! शीर्षक से एक मर्मस्पर्शी समाचार का प्रकाशन किया गया है। सिनेमा में भारत के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को स्थान मिला है तो वहीं गाने अनमोल में भी उन्हीं के फिल्म सफर का गीत जिंदगी का सफर ... को स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ में मनरेगा में मजदूरी पाने भटक रहे मजदूर लेख का प्रकाशन किया गया है तो वहीं पचरी के गोठ में केन्द्र सरकार की मोबाईल देने की योजना पर ‘‘तय हल्लो-हल्लो कहे, मय हाल गेहेंव रे ...’’ के माध्यम से कटाक्ष है। कुल मिलाकर देखा जाए तो पंचायत की मुस्कान का यह अंक नवीनता लिए हुए है तथा 15 अगस्त 1947 के बारे में दिए गए ऐतिहासिक तस्वीरों के लिए ही इसे आप हमेशा के लिए अपने पास संभालकर रख सकते हैं। 15 अगस्त 1947 की ब्लेक एंड व्हाईट तस्वीरें भी रंगीन पेजों पर काफी आकर्षक लग रहे हैं। इंटरनेंट पर इस अंक कोwww.panchayatkimuskan.blogspot.com पर पढ़ा जा सकता है वहीं पंचायत की मुस्कान में रोजाना के समाचारwww.panchayatkimuskan.com
पर देखे जा सकते हैं।
राष्ट्रीय मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान अब वेबसाईट पर: रोजाना की खबरें भी होगी अपडेट
मार्च 2011 से छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले से नियमित रूप से प्रकाशित हो रही पंचायत की मुस्कान अब नए रूप रंग, नए कलेवर और नए तेवरों के साथ इंटरनेट पर वेबप्रत्रिका के रूप में वेबसाईट पर प्रकाशित हो रही है। www.panchayatkimuskan.com में लागिन करके इस पत्रिका को पढ़ा जा सकता है। इस पत्रिका में एक ओर जहां राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान में डाली जाने वाली सामग्री तो डाली ही जाएगी वहीं दूसरी ओर इसमें रोजाना होने वाले देश विदेश की खबरों को भी स्थान दिया जाएगा। मासिक पत्रिका पंचायत की मुस्कान ने धीमें लेकिन विश्वसनीय तरीके से पाठकों के बीच अपना एक अलग मुकाम हासिल कर लिया है उसी तरह से इसके पाठकों को उम्मीद है कि वेब पत्रिका पंचायत की मुस्कान भी अपने पाठकों की कसौटी पर खरा उतरेगा।
शनिवार, 4 अगस्त 2012
लंदन ओलंपिक, साइना ने कांस्य पदक जीता
दुनिया में पांचवें नंबर की साइना नेहवाल ने लंदन ओलंपिक में चीनी खिलाड़ी वि वांग जिन के चोटिल होने के कारण मुकाबले से हट जाने से कांस्य पदक हासिल कर लिया है। वांग जिन जिस समय मैच से हटी उस समय उसने पहला गेम 21-18 से जीत लिया था। भारत का लंदन ओलंपिक में यह तीसरा पदक है।
साइना को छोड़कर सेमीफाइनल में तीनों खिलाड़ी चीनी थे। इस स्पर्धा का स्वर्ण और रजत चीन के खाते में जाना पक्का हो गया था। लेकिन कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में दुनिया की दूसरे नंबर की जिन और साइना के बीच जोरदार जंग देखने को मिली। जिन ने संघर्ष के बाद पहला गेम जीत लिया। लेकिन पहले गेम के दौरान ही उसने घुटने के नीचे चोट लगने की शिकायत की और इसके बाद टीम के फिजियो आए। पट्टी बांधकर उसने खेल जारी रखने का प्रयास किया और दूसरे गेम के लिए उतरने के बाद जिन ने एक अंक बना लिया लेकिन उसने आगे मैच जारी रखने में असमर्थता जताई और मैच से हट गई। इसके साथ ही मैच का परिणाम साइना के पक्ष में चला गया और कांस्य पदक हासिल कर लिया।
मैच के बाद साइना के कोच पुलैला गोपीचंद ने कहा कि जिस तरह से साइना को पदक मिला उन्हें अच्छा नहीं लगा। लेकिन साइना ने लंदन में शानदार खेल दिखाया था। ओलंपिक में पदक जीतने खास होता ही है। साइना कर्णम मल्लेश्वरी के बाद ओलंपिक में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। मल्लेश्वरी ने ख्000 में सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीता था।
जीत के बाद साइना के पिता हरवीर सिंह नेहवाल ने कहा, 'यह साइना को उसकी कड़ी मेहनत और लगन के एवज में ईश्वर की तरफ से मिला तोहफा है। निश्चित ही यहां किस्मत उसके साथ थी, लेकिन यह पदक साइना का था। उसने इसके लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था। चौबीस घंटे वह अभ्यास में लगी रहती थी। इसके लिए उसने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी।'
इससे पूर्व साइना सेमीफाइनल में नंबर एक वांग यहान के हाथों 21-13, 21-13 से मुकाबला हार गई थी।
शुक्रवार, 3 अगस्त 2012
लंदन ओलंपिक, विजय कुमार ने दिलाया भारत को रजत पदक
अमीरों का खेल माने जाने वाले निशानेबाज़ी में भारतीय सेना के एक सूबेदार ने अपन लोहा मनवाते हुए लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीता है.
भारत के लिए लंदन ओलंपिक में रजत पदक हासिल करने वाले विजय कुमार भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर काम कर रहे हैं. उनके पिता बांकूराम भी सेना से ही सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे.
विजय कुमार फिलहाल 26 साल के हैं और जब वो सेना में भर्ती हुए तब उनकी उम्र थी सिर्फ सोलह साल. निशानेबाज़ी उन्होंने सेना में आने के बाद ही शुरु की.
विजय कुमार हिमाचल प्रदेश के हरसौर गांव से आते हैं और 2003 से निशानेबाज़ी कर रहे हैं.
राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान मुझे कई बार विजय कुमार से मिलने का मौका मिला. लंदन के लिए क्वालिफाई करने के बाद मैंने उनका एक इंटरव्यू भी किया था.
शांत और मिलनसार
विजय कुमार की खास बात ये है कि वो ज़मीन से जुडे हुए हैं. उनसे मिलकर एहसास होता है कि वो उतने ही शांत, सहज और एकाग्र हैं जितना एक निशानेबाज़ को होना चाहिए और उतने ही मिलनसार और दोस्ताना जितना एक इंसान को होना चाहिए.
विजय कुमार कहते हैं कि वो निशानेबाज़ी में हैं इसके पिछे सिर्फ और सिर्फ सेना ही प्रमुख वजह है. वो अपने पिता को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं.
विजय कुमार ने सेना मे रहते हुए दो साल बॉक्सिंग भी की है और कहते हैं कि अगर वो निशानेबाज़ ना होते तो ज़रुर एक मुक्केबाज़ होते.
ऐसा नहीं हैं कि लंदन ओलंपिक में पदक जीतकर उन्होंने कोई चमत्कार कर दिखाया है, वो लगातार इसके लिए मेहनत करते रहे हैं. विजय कुमार और बाकि निशानेबाज़ों में फर्क ये है कि वो मीडिया की सुर्खियों में नहीं छाए.
मेहनत पर विश्वास
दिल्ली में हुए राष्ट्रमंण्डल खेलों में भी विजय कुमार ने चार पदक जीते थे जिनमें तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक शामिल था.
2011 में शूंटिंग विश्व कप में रजत पदक जीत उन्होंने लंदन का टिकट हासिल किया. इससे पहले 2009 में भी वो इसी स्पर्धा का रजत जीत चुके हैं. इतना ही नहीं ग्वांग्जू एशियाई खेलों में उन्होंने दो कांस्य पदक जीते थे.
विजय कुमार एक आम मेहनतकश भारतीय की तरह किस्मत में नहीं बल्कि मेहनत में विश्वास करते हैं और लंदन में जीता गया कांस्य पदक उनकी मेहनत का ही नतीजा है.
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